6 ऑगस्ट 2025 बुधवार सुबह, 8 बजे कांवड यात्रा हजारों श्रद्धालुओं के साथ वणी के जैताई मंदिर से शिरपूर के कैलाश शिखर देवस्थान की ओर प्रस्थान करेगी,ये दूरी लगभग पंद्रह किलोमीटर है।
युगों से चली आ रही कांवड यात्रा की परंपरा को अब वणी में भी निभाया जा रहा है,पिछले वर्ष केदारनाथ हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत स्वर्गीय राजकुमार एवं श्रद्धा जयस्वाल ने साथियों की मदत से कांवड यात्रा शुरू की थी।
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार जब देवताओं और असुरों ने समुंद्र मंथन किया तो उसमें से हलाहल कालाकूट नामक विष निकला जो सारी सृष्टि का संहार कर सकता था और उसे ग्रहण करने की क्षमता किसी भी देवता और असुर में नहीं थी तब भगवान शिव ने उस विष को ग्रहण किया और सृष्टि को संकटसे बाहर निकाला लेकिन विष को ग्रहण करने के बाद शिवजी का शरीर बहुत गर्म होने लगा उनका कंठ निला पड गया जिससे बाद में उन्हें निलकंठ बुलाया गया फिर देवताओं ने कांवड से गंगाजल लाकर से शिवजी का अभिषेक करना प्रारंभ किया और फिर शिवजी के शरीर गर्माहट कम होने लगी उसके बाद से ही माना जाता है कि कांवड यात्रा की परंपरा शुरू हुई।
त्रेतायुग में भगवान राम ने भी कांवड यात्रा कर शिवजी का अभिषेक किया था।
कांवड यात्रा में सहभागी होने की उत्सुकता और उत्साह वणी में चारों ओर दिखाई दे रहा है।
पूरी यात्रा के दौरान विविध प्रकार की झांकियां के साथ ढोल,ताशे,डीजे,डमरू दल भी चलेंगे जिसमे शिवतांडव भी प्रस्तुत किया जाएगा, ड्रोन से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी की जाएगी।
भक्तों की सुविधा के लिए यात्रा मार्ग जगहजगह अल्पोहार की व्यवस्था के साथ यात्रा की समाप्ति पर महाप्रसाद की व्यवस्था भी की गई है।
इस यात्रा के लिए एक मेडिकल टीम भी एंबुलेंस के साथ साथ पूरी यात्रा में शामिल रहेगी जिससे किसी को भी यात्रा में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होने पर तुरंत उपचार उपलब्ध होगा।
जिन्हें पैदल चलने में परेशानी है उनके लिए एमआयडीसी चौक से शिरपूर तक आने–जाने के लिए वाहनोंकी व्यवस्था भी की गयी है।
समाज के सभी स्तरों पर यात्रा के आयोजन के लिए सहयोग मिला है और स्वयंस्फूर्त होकर लोग यात्रा के नियोजन और आयोजन में भाग ले रहे हैं।

यात्रा के आयोजक श्री काशी महाशिवपुराण समिति ने बडी संख्या में भक्तों को सहभागी होकर कांवड यात्रा को यशस्वी बनाने का आवाहन किया है।

























