वणी/शिरपूर | 6 अगस्त 2025
तेज़ धूप, मूसलाधार बारिश और हजारों भक्तों की अटूट आस्था—
इस वर्ष की वणी से कैलाश शिखर तककी कावड़ यात्रा श्रद्धा, समर्पण और भक्ति का अद्भुत संगम बनकर उभरी। वणी के जैताई मंदिर से शिरपूरके कैलाश शिखर देवस्थान १५ किलोमीटर लंबी कांवड यात्रा 6 अगस्त को निकाली गई इस यात्रा में हजारों कावड़ियों ने हिस्सा लिया और “हर हर महादेव” के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया।
कावड़ियों ने शिवजी को जलाभिषेक अर्पित कर अपने संकल्प की पूर्ति की। यह यात्रा न सिर्फ धार्मिक, बल्कि भावनात्मक रूप से भी विशेष रही, क्योंकि इसका शुभारंभ गत वर्ष स्व. राजकुमार जायसवाल और श्रद्धा जायसवाल ने किया था, जिनका केदारनाथ हेलीकॉप्टर दुर्घटना में दुखद निधन हो गया था। इसवर्ष यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प श्री काशी शिव महापुराण समिति ने लिया और उसे पूरे सम्मान और व्यवस्था के साथ निभाया।

हर बाधा को किया पार, भक्ति में अडिग रहे भक्त
रास्ते में तेज धूप और बारिश की मार ने कई बार कावड़ियों की परीक्षा ली, लेकिन आस्था ने उन्हें डिगने नहीं दिया। हर पड़ाव पर जयघोषों के साथ यात्रा आगे बढ़ती रही। जगह–जगह पुष्पवर्षा, महाप्रसाद और विश्राम की सुंदर व्यवस्था रही।
यात्रा के आयोजन में भूतपूर्व विधायक संजीव रेड्डी बोदकुरवार, भूतपूर्व नगराध्यक्ष तारेंद्र बोर्डे, मनसे नेता राजू उंबरकर की सक्रिय भागीदारी रही।
तिलक चौक पर कांग्रेस नेता संजय खाड़े द्वारा अल्पाहार कीव्यवस्था की गई।
विधायक संजय देरकर द्वारा उनके घर के पास श्रद्धालुओं के लिए नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
भाजपानेता विजय बाबू चोरडिया ने फार्म हाउस पर अल्पाहार का आयोजन किया।
मनसे नेता अंकुश बोढे ने चारगांव चौकी पर चना, आलू–पोहा बांटा।
श्री काशी शिव महापुराण समिति ने शिरपुर स्थित कैलाश शिखर देवस्थान में महाप्रसाद की भव्य व्यवस्था की।
यात्रियों की सेवा में जुटे रहे पुलिस व स्वास्थ्य कर्मी
पूरी यात्रा में ट्रैफिक पुलिस, शिरपूर और वणी पुलिस स्टेशन के जवानों ने यातायात को सुचारु बनाएं रखा। पूरे रूट पर पुलिस की तैनाती और संयोजन से किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई। इसके लिए श्रद्धालुओं ने पुलिस प्रशासन का विशेष आभार जताया।
श्री काशी शिव महापुराण समिति ने इस बार यात्रा मार्ग पर एंबुलेंस, डॉक्टरों और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था कर मिसाल पेश की।
भावनात्मक और सांस्कृतिक संगम…
इस बार यात्रा का स्वरूप और भी भव्य था—डीजे, डमरू दल, झांकियां, शिव तांडव और विविध प्रकार की धार्मिक प्रस्तुतियों ने माहौल को रोमांचकारी बना दिया। बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुज़ुर्गों ने मिलक रइस यात्रा को एक उत्सव में बदल दिया।
कुछ श्रद्धालु पाटाळा (वर्धा नदी) से जल भरकर लाए थे, जिससे उनकी यात्रा दूरी 25 किलोमीटर तक होगई। यह भक्ति और संकल्प का प्रमाण है।
श्रद्धा की विजय, आस्था का पर्व
इस कावड़ यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी हों, जब मन में आस्था हो और मार्गदर्शन सही हो, तो हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया है कि वे हर वर्ष इस पवित्र यात्रा में भाग लेंगे और इस परंपरा को जीवित रखेंगे।
हर हर महादेव! 🚩

























