नवरात्रि स्पेशल खबर,
वणी तहसील की घाटियों और पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध भवानी मंदिर – इजासन (गोडगांव)यवतमाल जिले से लगभग १३५ किमी तथा वणी तहसील मुख्यालय से मात्र २७ किमी दूर, इजासन (गोडगांव) का भवानी माता मंदिर स्थानीय लोगों का आराध्य देवस्थान माना जाता है। मनोकामनाएँ पूरी करने वाली और भक्तों की पुकार पर तुरंत साथ देने वाली भवानी माता का यह मंदिर दुर्गम पहाड़ी और पठारी क्षेत्र में बसा हुआ, प्राचीन और जागृत देवस्थान के रूप में विख्यात है।इतिहास और विशेषताएँयहाँ स्थित हेमाडपंथी शैली का सूर्यमुखी भवानी मंदिर अत्यंत प्राचीन है। मंदिर परिसर में हनुमान मंदिर, नाग मंदिर, प्राचीन कुआँ, गोमुख तथा कई छोटी-बड़ी मूर्तियाँ देखने को मिलती हैं।मंदिर की कुएँ में बारहों महीने पानी भरा रहता है, चाहे ग्रीष्म ऋतु कितनी भी प्रचंड क्यों न हो।खास बात यह है कि इस पहाड़ी इलाके में कहीं भी खुदाई करने पर लगभग १२ फुट की गहराई पर पानी मिल जाता है।गोमुख से निकलने वाले जल को श्रद्धालु खेतों में छिड़काव हेतु या औषधीय उपयोग के लिए घर ले जाते हैं।श्रद्धालु और पर्यटनहर वर्ष विदर्भ, मराठवाड़ा सहित महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों तथा आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और अन्य राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन हेतु आते हैं। मंदिर हमेशा, दिन-रात २४ घंटे, भक्तों के लिए खुला रहता है।नवरात्रि पर्व पर विशेष उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।चैत्र और पौष महीने में यहाँ श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है।पहाड़, पठार और जंगल से घिरा रमणीय वातावरण इस क्षेत्र को पर्यटन हेतु भी उपयुक्त स्थान बनाता है।प्राकृतिक संपदामंदिर के आसपास फैले जंगल और पहाड़ियों में जंगली सुअर, सांभर, खरगोश, मोर, सियार जैसे पशु मिलते हैं। साथ ही यहाँ दुर्लभ सांप, रंग-बिरंगे गिरगिट, सुंदर तितलियाँ और विभिन्न पक्षी पाए जाते हैं। इस कारण यह मंदिर केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।श्रद्धा का केंद्रइजासन का भवानी माता मंदिर वणी तहसील के भक्तों का प्रमुख श्रद्धास्थल है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ भक्तिरस का अद्भुत माहौल बनता है और मंदिर परिसर भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर हो जाता है।


























