सिटी हब मीडिया वणी:
इबादत के पाक महीने रमजान की शुरुआत के साथ ही वणी शहर की एक नन्ही कली ने अपने हौसले से सबको दंग कर दिया है। महज 7 साल की मारिया फातिमा इस चिलचिलाती धूप और मार्च की तपिश के बीच न केवल पूरी शिद्दत से रोजा रख रही हैं, बल्कि उनकी ऊर्जा और सक्रियता बड़ों के लिए भी मिसाल बन गई है।

रोजा, स्कूल और कोचिंग:
ऊर्जा से लबरेज है मारिया,आमतौर पर माना जाता है कि रोजे के दौरान भूख और प्यास से थकान महसूस होती है, लेकिन मारिया फातिमा के मामले में यह बिल्कुल उलट है। वह सुबह सहरी करने के बाद पूरे उत्साह के साथ स्कूल जाती हैं, अपनी पढ़ाई पूरी करती हैं और नियमित रूप से कोचिंग क्लासेस भी जा रही हैं। उनकी दिनचर्या में कहीं भी थकान का नामोनिशान नहीं है। मारिया अपनी पढ़ाई और इबादत के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाकर चल रही हैं, जो उनकी अद्भुत इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

कठिन परिस्थितियों में अडिग संकल्प…
मार्च का महीना शुरू होते ही वणी में तेज धूप और गर्मी का असर दिखने लगा है। ऐसे मौसम में दिन भर बिना पानी की एक बूंद पिए रहना और शाम को इफ्तार का इंतजार करना वाकई में एक बहुत कठिन कार्य है। लेकिन 7 साल की छोटी सी उम्र में मारिया फातिमा पूरी निष्ठा के साथ ऊपर वाले की इबादत कर रही हैं और हर छोटे-बड़े नियम का पालन कर रही हैं।
परिवार का सहयोग और गर्व…
मारिया के इस समर्पण को देखकर उनके घरवाले काफी खुश हैं और उन्हें लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। परिवार उनके स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रख रहा है ताकि पढ़ाई और रोजे के बीच उनकी सेहत पर कोई असर न पड़े। घर के सदस्यों का कहना है कि मारिया की यह ऊर्जा और समर्पण उन्हें भी प्रेरित करता है।

एक सकारात्मक संदेश…
मारिया फातिमा की यह क्रिया सभी बच्चों के लिए एक प्रेरणा है। यह साबित करता है कि यदि मन में सच्चा समर्पण और लगन हो, तो उम्र और परिस्थितियाँ कभी बाधा नहीं बनतीं। वणी शहर में इस नन्ही रोजेदार की मेहनत और उसकी ऊर्जा की चारों ओर प्रशंसा हो रही है, और हर कोई उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं दे रहा है।

























