सुनिल तुगनायत, सिटी हब मिडिया वणी…
क्वीक कॉमर्स की डेडलाइन और खौफ के साये में दौड़ती जिंदगी।
बदलते दौर के साथ सामान की ऑनलाइन खरीदारी का तरीका तो बदल गया है, लेकिन इस आधुनिकता के पीछे जो खौफनाक हकीकत छिप रही है, वह अब सड़कों पर लहूलुहान होने लगी है। रिलायंस के ‘जियो मार्ट’ (Jio Mart) द्वारा शुरू की गई ’10 मिनट डिलीवरी’ की अंधी दौड़ अब वणी जैसे शांत और छोटे शहरों में आम जनता और खुद डिलीवरी करने वाले युवाओं की जान की दुश्मन बन चुकी है। मोहल्लों की तंग गलियां हों या मुख्य रास्ते, जियो मार्ट का कोट पहने युवा मोटरसाइकिल पर इस कदर फर्राटे भर रहे हैं कि राहगीर खौफ के साये में चलने को मजबूर हैं।

हाल ही में वणी की गली एक ऐसा ही दर्दनाक मंजर देखने को मिला। जियो मार्ट का सामान लेकर जा रहे दो डिलीवरी बॉयज की मोटरसाइकिल अत्यधिक रफ्तार के कारण अनियंत्रित हो गई और वे दोनों सड़क पर बेहद बुरी तरह से गिर पड़े। इस हादसे में दोनों युवाओं को गंभीर चोटें आईं। गनीमत यह रही बच्चे गली में खेल रहे थे और गाडी दूर गिरी वरना कोई बड़ा अनर्थ हो सकता था।
डिलीवरी बॉय्ज से सवाल और मजबूरी का फायदा: जब घायल युवाओं से पूछा गया कि आखिर वे इतनी खतरनाक रफ्तार में क्यों गाड़ी चला रहे थे, तो उनका जवाब आंखें खोलने वाला था। उन्होंने बताया, “सर, हमारी 10 मिनट की सख्त डेडलाइन है। अगर समय पर सामान नहीं पहुंचा, तो टाइमलाइन टूट जाएगी। कंपनी हमसे नाराज हो जाएगी, पेनाल्टी लगेगी और इस बेरोजगारी के दौर में नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है।”
एक डिलीवरी करने पर इन युवाओं को महज ₹40 के आसपास मिलते हैं। पेट भरने की मजबूरी में ये युवा चंद रुपयों के लिए अपनी और सड़क पर चलने वाले बुजुर्गों, महिलाओं तथा मासूम बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। वणी कोई मुंबई या दिल्ली जैसा महानगर नहीं है, जहां मील दूर सामान पहुंचाना हो और न ही ग्रोसरी (दाल, चीनी, साबुन) का सामान कोई ऐसी जीवन रक्षक दवा है, जिसके 10 मिनट की जगह 15 या 20 मिनट में पहुंचने पर कोई आफत आ जाएगी।
प्रशासन और ट्रैफिक विभाग की चुप्पी पर सवाल: इस पूरे मामले पर स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक विभाग की चुप्पी भी बड़े सवाल खड़े करती है। क्या ट्रैफिक पुलिस को सड़कों पर दौड़ती ये ‘मौत की गाड़ियां’ दिखाई नहीं देतीं? क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी? जियो मार्ट प्रशासन को इस नीति पर गंभीरता से आत्ममंथन करना होगा कि क्या ग्राहकों की 10 मिनट की तात्कालिक सुविधा, किसी अनमोल जिंदगी से ज्यादा कीमती है?.

























