प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष की दिवाली का उत्सव भारत के तट के पास समुद्र में स्थित INS Vikrant पर मनाया — गोवा-करवाड़ के तट के समीप भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत पर। 
उन्हें नौसेना के अधिकारी-सैनिकों एवं उनके परिवारों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, भोजन एवं बातचीत का अवसर मिला।
उन्होंने पोत के डेक से युद्धविमानों (MiG-29) के प्रदर्शन का अवलोकन किया — इस पूरे आयोजन में उत्सव के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का भाव भी स्पष्ट था। 
देशवासियों को संदेश
दिवाली की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह त्योहार “प्रकाश का पर्व”, “अंधकार पर विजय”, और “सकारात्मकता की जीत” का प्रतीक है।
उन्होंने यह याद दिलाया कि दीपावली का मूल भाव है — एकता, भाईचारा, एवं देश-हित में आगे बढ़ने का संकल्प।
पाकिस्तान को क्या कहा गया?
इस दिवाली अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक स्पष्ट संदेश पाकिस्तान की ओर भी भेजा:
उन्होंने ‘INS Vikrant’ को “ऐसा प्रतीक” बताया जिसने पाकिस्तान के लिए ‘नींद उड़ा देने वाला’ प्रभाव रखा है।
उन्होंने कहा कि एक देश जिसके पास आत्मनिर्भर रक्षा-शक्ति हो, वह ही चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।
उन्होंने इस साल की रक्षा-दृष्टि, संचालन (उदा. Operation Sindoor) और सीमाओं पर सेना-नौसेना-वायुसेना की त्वरित कार्रवाई का उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान के खतरे को झुकने वाला बताया गया।
इस तरह, दिवाली के शुभ अवसर पर यह राजनीतिक-रणनीतिक संकेत भी साफ हुआ कि भारत अपनी रक्षा-क्षमता और सतर्क मुद्रा के प्रति सजग है।
जवानों का हौसला कैसे बढ़ाया गया?
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से सेना-नौसेना-वायुसेना के जवानों को संबोधित किया और उन्हें प्रेरित किया:
उन्होंने कहा कि सैनिकों, नौसैनिकों, वायुसेननियों की तन्मय सेवा एवं बलिदान के बिना देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं रह सकतीं।
उन्होंने कहा कि इन्हीं वीरों के कारण भारत न केवल रक्षा-क्षेत्र में सक्षम हुआ है, बल्कि खुद-निर्भर (आत्मनिर्भर) बनने की दिशा में भी अग्रसर है।
उन्होंने इस सैनिक-परिवार के साथ दिवाली मनाना “परिवार के साथ त्योहार मनाने” जैसा बताया और अपनी ओर से इस भाव को व्यक्त किया कि वे भी ‘परिवार’ के रूप में उन्हें सलाम करते हैं।
उन्होंने इस अवसर पर पोत के कर्मियों एवं उनके परिवारों को मिठाई बाँटी तथा सांस्कृतिक-भोज में शामिल हुए। इस तरह, जवानों के साथ प्रत्यक्ष सान्निध्य से उनका मनोबल बढ़ाया गया।
निष्कर्ष
इस दिवाली, प्रधानमंत्री मोदी ने तीन-मुखी संदेश दिए:
1. राष्ट्रीय एकता-सकारात्मकता: दिवाली के प्रकाश-प्रतीक को देश के समृद्धि-और शांति-संदेश के रूप में प्रस्तुत किया।
2. दुश्मन-संकेत: पाकिस्तान सहित भारत की सीमाओं व रक्षा-क्षमता के प्रति सजग दृष्टि जाहिर की।
3. सेना-सैन्यबल-प्रेरणा: जवानों तथा नौसेना-पलटून-परिवार को उनका दर्जा-महत्व देते हुए मनोबल ऊँचा किया।
इस प्रकार यह दिवाली सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि देश-रक्षा,
सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता का प्रतीक-समय बनकर उभरी।

























