प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बड़े धूमधाम से BSNL की 4G सेवा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने दावा किया कि देश के करीब 98,000 सेंटरों पर बीएसएनएल अब 4G सेवाएं उपलब्ध कराएगा। मोदीजी ने कहा कि इससे न सिर्फ़ BSNL की गति बढ़ेगी बल्कि वह निजी कंपनियों से टक्कर लेने के लिए तैयार है।

लेकिन यह दावा जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाता दिखाई देता है।
वणी जैसे कई छोटे शहरों में BSNL ने 4G सेवा शुरू करने का दावा तो किया है, लेकिन वास्तविक सेवा बेहद खराब बताई जा रही है। कई इलाकों में तो 4G दूर की बात है, 2G नेटवर्क तक गायब है।
लोगों का सवाल है —
> आखिर BSNL की सेवाएं कब सुधरेंगी?
तेज़ इंटरनेट का लाभ आम जनता कब तक उठा पाएगी?
BSNL की यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि धीमी इंटरनेट स्पीड और बार-बार नेटवर्क गायब रहने से उपभोक्ता परेशान हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब निजी कंपनियां जैसे जियो, एयरटेल, वोडाफोन तेज़ स्पीड और स्थिर नेटवर्क दे रही हैं, तो लोग BSNL की ओर क्यों रुख करेंगे?
देश के सबसे बड़े सरकारी दूरसंचार नेटवर्क के बावजूद, BSNL पिछले कुछ वर्षों में पिछड़ गया है। मोदी सरकार के प्रयासों से सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अभी भी वह उम्मीद अधूरी लगती है।
अगर BSNL को डिजिटल इंडिया की रेस में टिके रहना है, तो उसे सेवा की गुणवत्ता, नेटवर्क स्थिरता और स्पीड — तीनों में सुधार करना होगा।
वरना यही कहा जाएगा कि —
> “सरकार घोड़ों की रेस में खच्चर को दौड़ाने की कोशिश कर रही है।”

























