सुनिल तुगनायत,सिटी हब मिडिया वणी…
शहर में गोवंश की हत्या और मांस की तस्करी का धंधा किस कदर बेखौफ हो चुका है, इसका प्रमाण शुक्रवार को देखने को मिला। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की सतर्कता से न केवल तस्करी के दो बड़े मामलों का भंडाफोड़ हुआ, बल्कि पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी एक बार फिर गंभीर प्रश्न निर्माण हो रहा है।

मिशन मिडनाइट: रात 4 बजे से शुरू हुआ लुका-छिपी का खेल…
घटना की शुरुआत शुक्रवार तड़के हुई। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को गुप्त सूचना मिली थी कि चंद्रपुर और घुग्घुस के रास्ते गोमांस की बड़ी खेप वणी में घुसने वाली है। सूचना मिलते ही कार्यकर्ताओं ने चंद्रपुर-घुग्घुस मुख्य मार्ग पर गोकुल नगर के पास ‘फील्डिंग’ लगा दी।
भोर के 4:00 बजे जब तस्कर दोपहिया वाहनों पर बोरे लादकर पहुंचे, तो कार्यकर्ताओं को देख उनके होश उड़ गए। पकड़े जाने के डर से तस्करों ने अपना रास्ता बदला और ‘वागदरा’ गांव की गलियों से शहर में घुसने की कोशिश की। लेकिन वहां भी दूसरे ग्रुप के कार्यकर्ताओं को तैनात देख तस्करों में हड़कंप मच गया। खुद को चारों तरफ से घिरा देख तस्करों ने मांस से भरे भारी बोरे बीच सड़क पर पटके और अपनी गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाकर अंधेरे में गायब हो गए। कार्यकर्ताओं ने पीछा किया, पर वे गलियों के रास्ते भाग निकले। इन बोरों में करीब 90 किलो 500 ग्राम गोमांस बरामद हुआ।
दूसरा मामला: पुलिस पंचनामे के दौरान ही फिर दुस्साहस, फिल्मी स्टाइल में दबोचा…
अभी पहले मामले की स्याही सूखी भी नहीं थी कि दो घंटे बाद, जब पुलिस और कार्यकर्ता पहले मामले का पंचनामा करने जा रहे थे, तभी एक और चौंकाने वाला दृश्य दिखा। मुंह पर कपड़ा बांधे एक संदिग्ध युवक बिना नंबर की जुपिटर गाड़ी पर तेजी से निकलता दिखा।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की पैनी नजर उस पर पड़ गई और उन्होंने तुरंत उसका पीछा शुरू किया। पीछा होता देख तस्कर ने गाड़ी को गली में मोड़ने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद कार्यकर्ताओं ने उसे दबोच लिया। इस अफरा-तफरी में तस्कर गाड़ी समेत नीचे गिर पड़ा। उस वक्त माहौल इतना तनावपूर्ण था कि यदि पुलिस मौके पर न होती, तो आक्रोशित भीड़ और कार्यकर्ताओं के गुस्से से कुछ भी अनहोनी हो सकती थी। पुलिस की मौजूदगी ने तस्कर की जान बचाई, वरना कानून-व्यवस्था का गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया था। इस जुपिटर गाड़ी से भी करीब 39 किलो गोमांस बरामद किया गया।

पुलिस की FIR और फॉरेंसिक जांच…
पुलिस ने इस मामले में विशाल पांडुरंग दुधबळे की शिकायत पर दो एफआईआर दर्ज की हैं:
सलमान शकिल शेख (25) और नावेद शेख रियाज (22) (90.5 किलो मांस)।
अब्दुल माजिद अब्दुल सत्तार (35) (39 किलो मांस और ज्युपिटर गाड़ी)।
पशु चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर मांस के नमूने लिए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच (CA) के लिए भेजा गया है। हालांकि, बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ता 100% दावा कर रहे हैं कि यह गोमांस ही है।
वणी के होटलों में ‘खूनी’ जायका?
विहिप के विशाल दुधबळे ने इस मामले पर आशंका जताई कि,शहर में आखिर इतनी बड़ी मात्रा में यह मांस जा कहां रहा था? आरोप लग रहे हैं कि वणी के कई होटलों और बिरयानी सेंटरों में चिकन-मटन के नाम पर यही मांस मिलाया जा रहा है। अनजाने में लोगों के धर्म और आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
बजरंग दल के सवाल: पुलिस की नाक के नीचे कब तक चलेगा यह खेल?
बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे अपनी जान हथेली पर रखकर तेलंगाना बॉर्डर से लेकर वणी की सड़कों तक तस्करों से लड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन मौन है।
अपराधी बेखौफ क्यों? पुराने मामलों के आरोपी आज भी जमानत पर बाहर घूम रहे हैं, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।
प्रशासन की चुप्पी: क्या पुलिस और प्रशासन के संरक्षण में यह काला धंधा फल-फूल रहा है?
सतर्कता की कमी: जब कार्यकर्ता पकड़ सकते हैं, तो पुलिस की गश्त टीमें इन तस्करों को क्यों नहीं देख पातीं?
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जड़ तक जाकर कार्रवाई नहीं हुई और होटलों की जांच नहीं की गई, तो बड़ा जनांदोलन छेड़ा जाएगा। वणी में बढ़ती गौ-हत्या की घटनाएं अब सामाजिक और धार्मिक तनाव का केंद्र बनती जा रही हैं।

























